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Maulik adhikar ke prakar मौलिक अधिकार के प्रकार

 आप का स्वागत है हमारे Achiverce Information में यहाँ पर हम परीक्षा से सम्बन्धित कई पोस्ट डालते है । तो आज का Topic है हमारे भारतीय सविधान में दिए गए सात मौलिक अधिकारो(maulik adhikaaro)के बारें में लिखा है। 

अधिकार का अर्थ।(adhikar ka arth) 

 
अधिकार राज्य द्वारा दी गई वह सुविधाएं और परिस्थितियाँ होती है जिनका प्रयोग करके मनुष्य अपना विकास करता है। 

दुसरे शब्दों में अधिकार समाज या राज्य द्वारा स्वीकार वह परिस्थितियाँ है जो मानव विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मौलिक अधिकार का अर्थ।maulik adhikar ka arth) 

मौलिक अधिकार(maulik adhikaar)वह महत्वपूर्ण अधिकार होते है जो संविधान द्वारा नागरिको को दिए गए और नागरिक के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक होते है भारत का संविधान जब बना था तब नागरिको के सात मौलिक अधिकारो का वर्णन किया गया था परन्तु 44 वां संसोधन जो 1978 में किया गया इसके द्वारा सम्पत्ति अधिकार को समाप्त कर दिया गया अत: वर्तमान में भारतीय नागरिको को छः मौलिक अधिकार(maulik adhikaar)प्राप्त है। 



 मौलिक अधिकार(maulik adhikar) का वर्णन संविधान के अध्याय-3 और अनुच्छेद 12 से 35 में किया गया है मौलिक अधिकार  प्रकार (maulik adhikar ke praka r) 

(1) समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18) 

(2) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22) 

(3) शोषण के विरोध अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24) 

(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28) 

(5) शिक्षा और संस्कृति का अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30) 

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32) 

नोट :- अनुच्छेद 31 मे सम्पति का अधिकार है जिसे अब मौलिक अधिकार(maulik adhikar) से हटा दिया है अब इसे कानूनी अधिकार बना दिया गया है। 

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(1) समानता का अधिकार

(i) कानून के समक्ष समानता (अनुच्छेद 14) :- संविधान के अनुच्छेद 14 में कहा गया है कि भारत राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और कानून सभी के लिए समान है चाहे अमीर हो या गरीब कानून कि दृष्टि में सब को समान समझा गया है। 

नोट:- (a)  अनुच्छेद 361 के अनुसार राष्टपति तथा राज्य के राज्यपाल के विरूद्ध उनके कार्यकाल में कोई फौजदारी मुकदमा नही चलाया जा सकता। 

(b) विदेशी राज्यो के अध्यक्ष तथा राजदूतो के विरूद्ध भारतीय कानूनो के अंर्तगत कोई कार्यवाही नही की जा सकती।

(ii) समाजिक समानता (अनुच्छेद 15) :- अनुच्छेद 15 मे कहा गया है कि समाज मे रहने वाले सभी लोग एक समान है। धर्म, जाति, वंश आदि के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नही किया जा सकता। 

नोट:-(a) राज्य महिलाओ और बच्चो के हितो की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था कर सकता है। 

(b) राज्य के SC/ST/OBC/को विशेष सुविधाएं प्रदान की जा सकती है। 

(iii) अवसर की समानता (अनुच्छेद 16) :-अनुच्छेद 16 में कहा गया है। कि राज्य के किसी सरकारी पद के लिए किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, भाषा, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नही किया जा सकता। 

अपवाद :-(a) कुछ नौकरियो को SC/ST/OBC के लिए आरक्षित किया जा सकता है। 

(iv) छुआछूत का अंत (अनु०17):- अनुच्छेद 17 में कहा गया है की अब छुआछूत समाप्त किया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति के के साथ अछूतो जैसा व्यवहार करना या उसको अछूत समझकर सार्वजनिक स्थानो के उपयोग से रोकना कानूनी अपराध है। 

कानून के अन्तर्गत छुआछूत को मानने वाले और उसका प्रचार करने वाले को 2 वर्ष की कैद और 1000 रू तक जुर्माना किया जा सकता है। 

(v) उपाधियों की समाप्ति (अनुच्छेद 18) :- अनुच्छेद 18 में कहा गया है कि उपाधि का अंत किया जाता है। सरकार कोई भी सामाजिक उपाधि प्रदान नही करेगी भारत का कोई भी नागरिक अथवा भारत मे रहने वाला कोई विदेशी भी राष्ट्रपति की आज्ञा के बिना विदेशो से भी उपाधि प्राप्त नही कर सकता। 


(2) स्वतंत्रता का अधिकार

(i) नागरिक स्वतंत्रताए (अनुच्छेद 19) :- अनुच्छेद 19 अंर्तगत नागरिको को छः प्रकार की स्वतंत्रताए दी गई है:-

(a) भाषण तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता। 

(b) शांतिपूर्ण तथा बिना हथियार सभा करने की स्वतंत्रता। 

(c) संस्था तथा संघ बनाने की स्वतंत्रता। 

(d) देश के अंदर कही भी घूमने की स्वतंत्रता। 

(e) देश के अंदर कही भी स्थाई रूप से रहने की स्वतंत्रता। 

(f) कोई भी रोजगार एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता। 

नोट:-सरकार इन सभी स्वतंत्रताओ पर शांति व्यवस्था, विदेशो से संबंध आदि को घ्यान मे रखते हुये उचित प्रतिबंध लगा सकती है। 

(ii) अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में स्वतंत्रता (अनुच्छेद 20) :-

(a) इसके अतर्गत किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक सजा नही दी जा सकती। 

(b) किसी भी व्यक्ति को स्वयं अपने खिलाफ साक्ष्य देने के लिए नही कहा जा सकता। 

(c) कोई भी कानून किसी भी ऐसे कार्य को जो उक्त कानून के लागू होने से पहले किया गया हो अपराध घोषित नही कर सकता। 

(iii) व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) :-अनुच्छेद 21 में लिखा है कि कानून द्वारा स्थापित पद्धति के बिना किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नही किया जाएगा। 

(iv) गिरफ्तारी एवं नजरबंदी के विरोध रक्षा (अनुच्छेद 22) :-

(a)गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार का कारण बताया जायगा। 

(b) गिरफ्तार व्यक्ति को अपने को मनपसंद वकील से करनी सलाह लेने का अधिकार है। 

(c)  गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायाधीश के सामने पेश किया जाना आवश्यक है। 

(e) किसी भी व्यक्ति न्यायधीश की आज्ञा के बिना 24 घंटे से अधिक बंदी नही बनाया जा सकता है। 

नोट:- बंदी बनाया गया व्यक्ति शत्रु देश का नागरिक है तो उसे अनुच्छेद 22 का लाभ नही मिलेगा। 

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार

(i) मानव व्यापार और बेगार  की मनाही ( अनुच्छेद 23) :- अनुच्छेद 23 में कहा गया है कि मानव का व्यापार नही किया जा सकता और किसी से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम नही कराया जा सकता। 

(ii) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चो से काम करने पर रोक (अनुच्छेद 24) :- अनुच्छेद 24 में कहा गया है कि 14 वर्ष तक के बच्चो से खतरनाक उघोगो, कारखाने आदि में काम नही कराया जा सकता। 

(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

(i) धर्म को मानने और प्रचार करने की स्वतंत्रता(अनु० 25) :-अनुच्छेद 25 में कहा गया है की भारत के प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता। 

नोट:- (a) धार्मिक संस्थाओ की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा सकती है। 

(b) समाज के में किसी धार्मिक परम्परा पर रूक लगाई जा सकती है जैसे 2020 कोरोना वायरस कि वजह से कई धार्मिक त्यौहार और परम्परा परम्परा पर रूक लगा दिया था। 

(ii) धार्मिक कार्यो के प्रबंध सस्था की स्वतंत्रता (अनु० 26) :- अनुच्छेद 26 में कहा गया है की सभी धर्मों के लिए लोगो को अपने धार्मिक कार्यो का स्वय प्रबंध करने की स्वतंत्रता है। 

धार्मिक कार्यो की प्रबंधं सस्था बनाने की स्वतंत्रता धार्मिक कार्यो के लिए चल अचल सम्पत्ति एकत्रित करने की स्वतंत्रता। 

(iii) धर्म विशेष प्रसार के लिए कर न देने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 27) :-

अनुच्छेद 27 में कहा गया है कि किसी विशेष धर्म को बढ़ावा देने के लिए कर  देने के लिए बाध्य नही किया जा सकता। 

(iv) सरकारी शिक्षण संस्थाओ मे धार्मिक शिक्षा पर रोक (अनुच्छेद 28) :-

किसी भी सरकारी संस्थान में कोई धार्मिक शिक्षा नही दी जा सकती है धार्मिक शिक्षा उस स्कूल या संस्था में दी जा सकती है जो सरकार से मान्यता प्राप्त है लेकिन जिसकी स्थापना धार्मिक संस्था ने की है।  

 

(5) शिक्षा और संस्कृति का अधिकार

(i) भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार(अनुच्छेद 29) :-

अनुच्छेद 29 में कहा गया है कि अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को धर्म, भाषा आदि के आधार पर प्रवेश देने को मना नही किया जा सकता है। 

(ii) शिक्षा संस्था स्थापित करने का अधिकार (अनुच्छेद 30) :- अनुच्छेद 30 में कहा गया है कि अल्पसंख्यक अपनी शिक्षा स्थापित कर सकते है और सरकार ऐसी शिक्षा संस्थाओ को सहायता देने मे भेदभाव नही कर सकती। 

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार 

अनुच्छेद 32 में संवैधानिक उपचारों के अधिकारो के बारे उल्लेख किया गया है जिसके अनुसार:-

अनुच्छेद 226 के अनुसार इन मौलिक अधिकारो को लागू करवाने का अधिकार उच्च न्यायालय को भी दिया गया है। 

सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारो(maulik adhikaro) को लागू करने के लिए निर्दोष, आदेश और लेख, बंदी प्रत्यक्षीकरण , परमादेश, मनाही आज्ञा पत्र, उत्प्रेषणादेश और अधिकार पृच्छा जारी करने का अधिकार प्राप्त है। 

उन परिस्थितियों के अनुसार जिनका वर्णन सविधान में किया गया है संवैधानिक उपचारो के मौलिक अधिकार को स्थगित नही किया जा सकता

इस अधिकार को सविधान कि आत्मा भी कहा गया क्योंकि इसे बाकी मौलिक अधिकारो कि रक्षा के लिए बनाया गया है 

(7) मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक सिध्दांतों मे क्या अंतर है? 

(i) नीति निर्देशक तत्व राज्य से संबंधित है जबकि मौलिक अधिकार नागरिको को प्राप्त है।

(ii) नीति निर्देशक सिध्दांतों पर कोई सीमाए नही है जबकि मौलिक अधिकारो पर सीमाए लगी है। 

(iii)को कानून का संरक्षण प्राप्त नही है जबकि मौलिक अधिकारो कानून का संरक्षण प्राप्त है। 

(iv) मौलिक अधिकारो का वर्णन सविधान के अध्याय-3 में किया गया है जबकि  नीति निर्देशक सिध्दांतों का वर्णन अध्याय- 4 में किया गया है। 

(v) मौलिक अधिकारो से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना होती है जबकि नीति निर्देशक सिध्दांत देश में सामाजिक आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करते है । 

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