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ड्रोन क्या है? ड्रोन पर निबंध (ड्रोन के उपयोग उसके प्रकार एवं चुनौतियां)

What is drone in Hindi प्रिय पाठक आज हम बहुत ही महत्वपूर्ण विषय और बहुत ही नवीनतम तकनीक से जुड़े विषय के बारे में बताने जा रहा है जो ड्रोन तकनीक से सम्बन्धित है इसमें हम ड्रोन तकनीक के उपयोग, ड्रोन के प्रकार,ड्रोन के उपयोग मे चुनौतियां और भारत में इस ड्रोन तकनीक का क्या भविष्य है?तो चलिए जानते हैं कि ड्रोन क्या है? What is drone

ड्रोन क्या है? What is drone

ड्रोन तकनीक क्या है? What is drone technology

विज्ञान और तकनीक के विकास बिना कोई भी देश शिखर पर पहुँचने की कल्पना नहीं कर सकता। कहा जा सकता है कि विज्ञान ही एकमात्र ऐसी रोशनी है, जिसे कहीं भी रोशन करना, सभी जगहों को रोशन करने जैसा है। विज्ञान के क्षेत्र में हुआ कोई भी आविष्कार मानव जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाता है। 

इसी सन्दर्भ में वर्तमान में ड्रोन तकनीक के विकास ने पूरे विश्व के साथ भारत में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज ड्रोन तकनीक का उपयोग न केवल सामरिक क्षेत्र में, बल्कि जीवन के विविध क्षेत्रों में हो रहा है, लेकिन इस तकनीक के सन्दर्भ में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिस कारण इसका उपयोग सावधानीपूर्वक करने की जरूरत है।

What is drone in Hindi


ड्रोन का अर्थ drone meaning in hindi

मानव रहित विमानों को ड्रोन कहते हैं। यह रिमोट से संचालित होने वाला छोटा विमान है। सही अर्थों में यह एक ऐसा रोबोट है, जो उड़ सकता है। ड्रोन का हिन्दी अर्थ नर मधुमक्खी है और उड़ने के कारण ही इसे यह नाम मिला है। यह मधुमक्खी के ही समान उड़ता है और एक जगह पर स्थिर रहकर भी मँडरा सकता है। इसे एक रिमोट अथवा इसके लिए बनाए गए विशेष कण्ट्रोल रूम से उड़ाया जाता है। ड्रोन का प्रयोग : ऐसे दुर्गम स्थानों पर किया जाता है, जहाँ मनुष्य आसानी से नहीं पहुंच सकता है।

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ड्रोन का विकास Development of drones

ड्रोन अथवा मानव रहित विमान बनाने की कोशिश प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ही आरम्भ हो गई थी। वर्ष 1918 में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने हवाई तारपीडो का निर्माण आरम्भ किया तथा 'कटेरिंग बैग' नाम से इस यन्त्र के कुछ परीक्षण भी किए गए, लेकिन इसका पूर्ण विकास होने से पूर्व ही प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त हो गया। यद्यपि मानव रहित यन्त्र का परीक्षण जारी रहा।

वर्ष 1935 में ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स ने 'द क्वीन बी' नाम का रेडियो तरंगों से संचालित और निर्देशित चालक रहित विमान तैयार किया, जिसके लिए पहली बार ड्रोन शब्द का प्रयोग हुआ।

फिर वर्ष 1942 में जर्मनी के पिनुमुन आर्मी रिसर्च सेण्टर ने बी-1 फ्लाइंग बॉक्स का परीक्षण किया। इसी दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने भी ड्रोन को निशाना साधने और प्रशिक्षण के लिए प्रयोग करना आरम्भ किया।

 6 अगस्त, 1946 को अमेरिका के पी-70 फ्लाइंग पोटेस्ट नाम के ड्रोन ने मुरोक आर्मी एयर फील्ड से उड़ान भरी। वियतनाम युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने बड़ी संख्या में मानव रहित विमान तैनात किए थे तथा इनका प्रयोग पर्चे गिराने और खुफिया गतिविधियों के लिए हुआ।

फरवरी, 2002 में ट्रेन का प्रयोग पहली बार किसी को निशाना बनाने के लिए किया गया। 4 फरवरी, 2002 को अमेरिकी खुफिया एजेन्सी सीआईए (CIA) ने ओसामा बिन लादेन को निशाना बनाने के लिए अफगानिस्तान के पटकिया प्रान्त के खोस्त कस्बे में ड्रोन का प्रयोग किया था, यद्यपि ओसामा वहाँ नहीं था।

इसी दौरान ईरान और इजरायल में भी सैन्य और जासूसी ड्रोन का विकास किया गया। भारत में भी डीआरडीओ तथा हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड कई श्रेणी के ड्रोन का विकास कर रहे हैं, जिसमें रुस्तम-1, रुस्तम-2 आदि प्रमुख हैं।

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ड्रोन के प्रकार Types of drones

भारत के नागर विमानन महानिदेशालय ने ड्रोन के मुख्यत: पाँच प्रकार निर्धारित किए हैं।

1.नैनो ड्रोन इसका वजन 250 ग्राम तक होता है।

2. माइक्रो ड्रोन इसका वजन 250 ग्राम से अधिक, लेकिन 2 किग्रा से कम होता है। 3. स्मॉल ड्रोन इसका वजन 2 किग्रा से अधिक, लेकिन 25 किग्रा से कम होता है।

4. मीडियम ड्रोन इसका वजन 25 किग्रा से अधिक, लेकिन 150 किग्रा से कम होता है। 5. लार्ज ड्रोन इसका वजन 150 किग्रा से अधिक होता है।

Drone camra का उपयोग Use of drones

1. राहत और बचाव अभियान वर्तमान में प्राकृतिक आपदा जैसे- बाढ़, भूकम्प आदि के समय राहत और बचाव के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। अप्रैल, 2015 में नेपाल में आए भीषण विनाशकारी भूकम्प की तस्वीरें ड्रोन से ली गई थीं। भारत के केरल राज्य में आई विनाशकारी बाढ़ की भयावहता की स्थिति जानने के लिए भी ड्रोन का प्रयोग किया गया था। सीमा पर निगरानी हेतु ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। 

2. कृषि क्षेत्र में विश्व के विभिन्न देशों में आज किसान ड्रोन के माध्यम से फसलों की निगरानी से लेकर दवा का छिड़काव कर रहे हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि कृषि के क्षेत्र में भी ड्रोन का क्रान्तिकारी उपयोग हो रहा है। 

3. असामाजिक तत्त्वों को नियन्त्रित करने में वर्तमान में ड्रोन का उपयोग कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान राज्य पुलिस ने ड्रोन कैमरों का उपयोग किया, जिससे वहाँ की स्थिति पर नजर रखने में काफी सहायता मिली थी।

हैदराबाद पुलिस शहर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए ड्रोन का प्रयोग कर रही है। इसी प्रकार आन्तरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को भी बनाए रखने के लिए देश के बड़े महानगरों में छतों की तलाशी और बड़े जुलूसों पर नजर रखने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।

4. सामानों की होम डिलीवरी में वर्तमान में गूगल और अमेजन जैसी कम्पनियाँ ट्रेन के द्वारा सामानों की होम डिलीवरी करने की तैयारी में है। अमेजन ने भारत में ड्रोन विमानों की तैनाती के लिए पेटेण्ट भी फाइल किया है।

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5. रेलवे क्षेत्र में भारतीय रेलवे ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और ट्रैक मेंटेनेन्स की निगरानी और चेकिंग के लिए ड्रोन कैमरों के प्रयोग करने का निर्णय लिया है। साथ ही राहत और बचाव अभियान में भी रेलवे द्वारा ड्रोन कैमरा तैनात किया जाएगा। रेलवे के जबलपुर मुख्यालय में सबसे पहले ड्रोन कैमरों का प्रयोग शुरू किया गया।

6. स्वच्छ भारत अभियान में ड्रोन तकनीक का उपयोग स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए भी किया जा रहा है। तेलंगाना के करीमनगर में नदियों और तालाबों के पास खुले में शौच करने वालों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। 

7. सैन्य क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का सबसे व्यापक प्रयोग सैन्य क्षेत्रों में किया जाता है। अमेरिकी सेना पाकिस्तान के सीमान्त कबायली क्षेत्रों में तालिवान लड़ाकों की खोज में ड्रोन का उपयोग कर रही है। अफगानिस्तान में तालिवान को उखाड़ फेंकने में नाटो सैनिकों ने ड्रोन का व्यापक सहारा लिया और इसमें ड्रोन ने सफलतापूर्वक भूमिका निभाई।

8. अन्य क्षेत्र में ड्रोन कैमरों का प्रयोग ट्रैफिक नियन्त्रण करने में भी किया जा रहा है। साथ ही सर्वेक्षण, प्रोफेशनल फोटोग्राफी और हवाई मैपिंग में भी ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। किसी भी चीज का डॉक्यूमेण्टेशन करते समय पारम्परिक लेजर स्कैनिंग में रिजोल्यूशन की सीमा को दूर करने में ड्रोन का प्रयोग किया जाता है।

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ड्रोन के उपयोग में चुनौतियां

1.ड्रोन एक मशीन है, जिस कारण अन्य मशीनों की तरह इसे भी आसानी से हैक किया जा सकता है। हैकर इसकी नियन्त्रण प्रणाली पर हमला कर इसे क्षति पहुंचा सकता है, साथ ही गोपनीय जानकारी भी हासिल कर सकता है।

2. ड्रोन यदि असामाजिक तत्वों को मिल जाता है तो ये इसके माध्यम से न सिर्फ जासूसी कर सकते हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर हमला भी कर सकते हैं।

 3.ड्रोन उड़ान भरते समय पक्षियों से टकरा सकता है।

4.अन्तर्राष्ट्रीय बायु परिवहन एसोसिएशन ने ड्रोन को बायु क्षेत्र के लिए खतरा माना है तथा इससे जुड़ी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक विचार-विमर्श करने को कहा है। 

 5 अपराधी और चरमपन्थी ड्रोन के माध्यम से बड़ी बारदात कर सकते हैं, जैसे किसी सुरक्षित इलाके में विस्फोटक गिराना, जेल के अन्दर अवैध सामान पहुँचाना, जैविक हथियार से हमला आदि।

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भारत की ड्रोन नीति

1 दिसम्बर, 2018 को सम्पूर्ण भारत में ड्रोन नीति लागू की गई। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति 18 वर्ष की आयु से पहले ड्रोन नहीं उड़ा सकता है। साथ ही वह व्यक्ति दसवीं पास हो और उसे ड्रोन से सम्बन्धित बुनियादी चीजों की जानकारी हो । 

इस नीति के तहत् कृषि, स्वास्थ्य, आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के बाणिज्यिक प्रयोग को मंजूरी दी गई है.. लेकिन खाद्य सामग्री समेत अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए अनुमति नहीं दी गई है। 

इस नीति के तहत ड्रोन उड़ाने सम्बन्धी निम्नलिखित जोन निर्धारित किए गए हैं

  1. रेड जोन उड़ान की अनुमति नहीं। 
  2. येलो जोन नियन्त्रित हवाई क्षेत्र उड़ान से पहले अनुमति आवश्यक।
  3. ग्रीन जोन अनियन्त्रित हवाई क्षेत्र स्वचालित अनुमति
  4. नो ड्रोन जोन कुछ विशेष जगहों पर ड्रोन संचालन की अनुमति नहीं।

शादियों और पार्टियों में भी 60 मीटर से ऊपर ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता है। इस नीति के तहत् किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर दण्ड और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

निष्कर्ष

ड्रोन क्या है? What is drone इस प्रकार, कहा जा सकता है कि वर्तमान में ड्रोन तकनीक अपने विकास के नए दौर से गुजर रहा है तथा यह जीवन के विविध क्षेत्रों में क्रान्तिकारी भूमिका निभा रहा है, लेकिन साथ ही इसके लिए यह सुनिश्चित करना भी काफी महत्त्वपूर्ण है कि इसका प्रयोग मानव जाति की सहायता एवं उसके हित के लिए ही हो, न कि असामाजिक तत्वों द्वारा ड्रोन का प्रयोग मानवीय हितों को नुकसान पहुँचाने के लिए हो।

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