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Essay on abrogation of Article 370 in hindi अनुच्छेद 370 के निरसन पर निबंध

 Essay on abrogation of Article 370 in hindi प्रिय पाठकों आज हम बहुत ही महत्वपूर्ण विषय अनुच्छेद 370 के निरसन के बारे इस लेख में बताने जा रहे हैं आखिर Article 370 क्या है? और क्यों इसे हटाना जरुरी था इन ही सभी प्रश्नों के जवाब देने का प्रयास किया है। यह विषय परीक्षा की दृष्टि से भी बहुत आवश्यक है। 

Essay on abrogation of Article 370 in hindi

कश्मीर के विषय में किसी अज्ञात शायर ने कहा है कि "अगर फिरदौस बर-रु-ए-जमीं अस्त, हम अस्तो, हमीं अस्ती, हमी अस्तो" अर्थात् इस धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर में है, लेकिन कालान्तर में (आजादी व विभाजन के पश्चात् ) धरती का स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर अनेक कारणों से एक विवादित क्षेत्र बन गया Article 370 इन्हीं विवादों में से एक प्रमुख विवाद रहा है। वर्तमान सरकार ने अगस्त, 2019 में Article 370 को समाप्त कर कश्मीर में शान्ति स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है।

आजाद भारत की राजनीति में यह सबसे साहसिक और दृढ इच्छाशक्ति से भरा हुआ निर्णय था, क्योंकि वर्ष 1947 में अगस्त के महीने में ही भारत को आजादी मिली तथा अगस्त, 2019 में ही संसद में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 को पारित किया गया, जिसके अन्तर्गत भारतीय संविधान के Article 370 (एक खण्ड को छोड़कर) और अनुच्छेद 35A को निरसित कर दिया गया।

Essay on abrogation of Article 370 in hindi


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Article 370 historical perspective

जम्मू-कश्मीर में तीन मुख्य भौगोलिक क्षेत्र आते है-जम्मू कश्मीर और लद्दाख जम्मू क्षेत्र हिन्दू बहुल, कश्मीर मुस्लिम बहुल तथा लद्दाख बौद्ध बहुल क्षेत्र है। इन तीनों में सर्वाधिक समस्याग्रस्त क्षेत्र कश्मीर है, लेकिन इसका प्रतिकूल प्रभाव पूरे जम्मू-कश्मीर पर पड़ता है। इसी सन्दर्भ में Article 370 की समाप्ति को ऐतिहासिक कदम माना गया है, लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या कारण था कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से विशेष स्थिति प्रदान की गई थी।

जब ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 पारित किया, तो उसके साथ ही जम्मू-कश्मीर सहित सभी रियासतों पर से ब्रिटिश सम्प्रभुता समाप्त हो गई। अब इन देशी रियासतों को यह अधिकार था कि वे चाहें तो भारत या पाकिस्तान के डोमिनियन में विलय कर लें या अपना स्वतन्त्र अस्तित्व बनाए रखें। जम्मू-कश्मीर के शासक हरिसिंह ने स्वतन्त्र रहने का फैसला किया, किन्तु 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थित आजाद कश्मीर सेना ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था।

फलतः महाराजा हरि सिंह ने इस संकट से निपटने हेतु भारत के पक्ष में विलय को स्वीकार किया। 26 अक्टूबर,1947 को महाराजा हरिसिंह ने विलय-पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया, जिसके अनुसार जम्मू-कश्मीर ने तीन विषयों प्रतिरक्षा, विदेशी मामले तथा संचार पर भारतीय संघ की सर्वोच्चता स्वीकार कर ली, जबकि शेष मामलों में अपनी स्वायत्तता बनाए रखी।

इस विलय-पत्र के हस्ताक्षर के बाद तत्कालीन भारतीय प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता अपनी स्वयं की संविधान सभा द्वारा अपना संविधान बनाएगी तथा निर्धारित करेगी कि जम्मू-कश्मीर पर भारतीय संघ का अधिकार कितना तथा कैसा हो। इस दौरान भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में सिर्फ अन्तरिम व्यवस्था करेगा। इसी अन्तरिम व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए भारतीय संविधान में Article 370 शामिल किया गया, जिसके अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकार दिया गया।

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Article 370 विशेषाधिकार की समाप्ति

संविधान विशेषज्ञों के अनुसार अनुच्छेद 370 को समाप्त करने को लेकर संविधान में दो बातें कही गई हैं-प्रथम, यह कि अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सहमति से राष्ट्रपति इसे हटा सकता है, जबकि दूसरा प्रावधान यह है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद दो-तिहाई बहुमत से इसको समाप्त कर सकती है, क्योंकि अनुच्छेद-368 संसद को संविधान के किसी भी अनुच्छेद में संशोधन करने या उसको हटाने का अधिकार देती है।

ध्यातव्य है कि पूर्व में इसे समाप्त करने के सम्बन्ध में यह प्रावधान था कि राष्ट्रपति एक आदेश के द्वारा और -कश्मीर संविधान सभा की सहमति से इसे समाप्त कर सकता है, किन्तु इस सन्दर्भ में वस्तुस्थिति यह थी कि जम्मू-य जम्मू-कश्मीर संविधान सभा 26 जनवरी, 1957 को ही भंग की जा चुकी थी और वर्तमान में राज्य में राज्यपाल शासन था, अतएव राष्ट्रपति ने इस सन्दर्भ में अनुच्छेद 370 के खण्ड (3) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए राज्य के राज्यपाल की सहमति से अपने आदेश के माध्यम से इसे समाप्त कर दिया था।

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019

भारत के वर्तमान गृहमन्त्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा में 5 अगस्त, 2019 को तथा लोकसभा में 6 अगस्त, 2019 को पारित किया गया तथा 9 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिया, जिसके बाद इसने अधिनियम का रूप धारण कर लिया। यह अधिनियम 31 अक्टूबर, 2019 से प्रभावी है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद-354 के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेषाधिकार समाप्त हो गया। इस सन्दर्भ में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की महत्त्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं, जिनके अनुसार जम्मू-कश्मीर की स्थिति में परिवर्तन हुआ है। 

  • इस अधिनियम के अनुसार जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभाजित किया गया है पहला, जम्मू-कश्मीर, दूसरा,लद्दाख
  • ‌जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद-239A के अन्तर्गत पुदुचेरी के समान विधानसभा के साथ संघ राज्य क्षेत्र बनाया गया, जहाँ का प्रशासन उपराज्यपाल चलाएगा। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होगा।
  • ‌जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा में चार सीटें, लोकसभा में 5 सीटें और विधानसभा में कुल 114 सीटें होंगी। विधानसभा में राज्यपाल 2 महिला सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।
  • ‌अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को लोकसभा एवं विधानसभा सीटों के निर्वाचन में आरक्षण प्रदान किया जाएगा, जबकि पहले अनुसूचित जनजाति को आरक्षण नहीं होगा।
  • ‌ इस अधिनियम के अनुसार मुख्यमन्त्री सहित मन्त्रियों की संख्या विधानसभा के सदस्यों की संख्या का 10% होगी।
  • ‌ इस अधिनियम के अनुसार लद्दाख को विधानसभा के बिना संघ राज्य क्षेत्र बनाया गया। यहाँ से लोकसभा के लिए एक सदस्य का निर्वाचन होगा।
  • ‌इस अधिनियम के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर की दोहरी नागरिकता, अलग संविधान और अलग ध्वज का प्रावधान समाप्त कर दिया गया। तिरंगे और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अब अपराध माना जाएगा।
  • ‌अब देश का कोई भी नागरिक यहाँ सम्पत्ति खरीद सकता है, व्यापार कर सकता है, साथ ही नौकरी भी पा सकता है।
  • ‌अब राज्य की पुलिस केन्द्र के अधिकार में आ गई है अर्थात् संघ राज्य क्षेत्र होने के कारण कानून एवं व्यवस्था पर केन्द्र का नियन्त्रण होगा।
  • ‌इस नवीन कानून के लागू होने से किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी करने पर जम्मू-कश्मीर की महिला के अधिकारों व नागरिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही साथ पाकिस्तान के नागरिकों को मिला विशेषाधिकार समाप्त हो गया।
  • ‌अब जम्मू-कश्मीर में भी Article 370 के अन्तर्गत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। साथ ही साथ यहाँ भी अब शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार व अन्य संसदीय कानून तथा संवैधानिक संशोधन लागू होंगे तथा भारतीय दण्ड संहिता भी लागू होगी।
  • ‌इस अधिनियम के अनुसार अब भारत का कोई भी नागरिक जम्मू और कश्मीर का मतदाता और चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। साथ ही साथ सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भी मान्य होगा।

Conclusion

Essay on abrogation of Article 370 in hindi जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकार को समाप्त कर भारतीय संघ में केन्द्रशासित प्रदेश के रूप में शामिल करना भारत सरकार की दृढ इच्छाशक्ति व साहसिक तथा ऐतिहासिक निर्णय है। इस दौरान भले ही कुछ अशान्ति कायम रही, किन्तु यह प्रयास मानवता के दृष्टिकोण से प्रेरित होने के कारण इसकी स्वीकार्यता बढ़ी है। ऐसे में कश्मीर की आबाम का प्यार व विश्वास हासिल करने के लिए भारत सरकार को वहाँ बिकासपरक नीतियों को बढ़ावा देना होगा, लोगों को सुरक्षा प्रदान करनी होगी, शीघ्र ही विधानसभा चुनाव करवाकर लोकतन्त्र बहाल करना होगा। इस कार्य में भारत सरकार के अतिरिक्त भारतीय राजनेताओं की भी अहम भूमिका होगी।

इसके लिए वोट बैंक व सत्ता की राजनीति की जगह राष्ट्र की सुरक्षा व विकास की राजनीति को बढ़ावा देना होगा। फिर पूँजीपतियों को कश्मीर में निवेश करना चाहिए, जिससे वहाँ विकास को गति मिले। सबसे बढ़कर हम सभी भारतीयों का भी यह दायित्व है कि इस निर्णय का स्वागत करें तथा यह सोच विकसित करें कि कश्मीर हमारा है, लेकिन उससे पहले कश्मीरी हमारे हैं। तभी जाकर विश्वास का माहौल कायम होगा, भाईचारा बढ़ेगा, शान्ति कायम होगी तथा भारतीय संघ मजबूत होगा।

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